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16 November 2018

Arecibo Message - इसको लेकर google ने बनाया खाश डूडल , आइये जाने क्या ये मेसेज

गूगल आज के समय में सबसे ज्यादा यूज़ किया जाने वाला सर्च इंजन है और यह खाश मोको पर डूडल पेश बनाता है जो उस दिन के इतिहास पर आधारित होते है आज भी google ने डूडल बनाया है यह बहुत ही अदभुत घटना पर आधारित है आज का डूडल 44 साल पहले कि एक घटना याद दिला रहा है जब वैज्ञानिको ने धरती के बाहर मानव कि मोजुदगी का पता लगाने के लिए एक रेडियो मेसेज जारी किया था इस मेसेज को arecibo messege कहा गया था . इस मेसेज को रिलीज किये हुए 44 साल हो गये परन्तु इसका आज भी जवाब नहीं मिला है .

इस मेसेज का नाम अरेसिबो मेसेज क्यों रखा गया 

दरअसल बात 1974 कि है दुनियाभर के कुछ प्रसिद्ध अन्तरिक्ष वैज्ञानिको ने प्युटो रिको नामक घने जंगल में बनी अरसिबो ऑब्जवेट्री में एक संगोष्ठी आयोजित की.  इनका मकसद यह जानना था कि कही और ब्रह्मांड में मानव निवास करता है या नहीं . पर सभी के सामने सवाल आया कि अगर मानव कही रहता है तो हम उन तक मेसेज कैसे पहुंचाएंगे . इसके लिए एक रेडियो मेसेज तेयार किया गया जो तीन मिनट कि अवधि का था . यह मेसेज arecibo से भेजा गया इसलिए इसका नाम arecibo message रखा गया .


अरेसिबो मेसेज में क्या था 

तीन मिनट वाले इस रेडिओ मेसेज में कूल 1679 बाइनरी डिजिट शामिल थे , अगर इस मेसेज को ग्राफ पर उतारा जाये तो कूल 72 rows और 23 colum बनेगे . वैज्ञानिको का मानना था कि स्टार क्लस्टर एम - 13 पर जीवन हो सकता है और वहां से इस रेडिओ मेसेज का जवाब आएगा . हम आपको बतादे कि M-13 पृथ्वी से 25000 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है यह मेसेज टेलिस्कोप द्वारा भेजा गया था पंरतु आज तक इसका कहीं से भी जवाब नहीं मिला है 

अभी तक इसका जवाब क्यों नहीं मिला 

वैज्ञानिको का मानना है कि इस मेसेज को अपने लक्ष्य तक पहुँचने में लगभग 25 हजार साल लगेंगे क्योंकि M-13 एक तारा है जो तीन लाख तारो के समूह में अकेला तारा है इसे हरक्युलिस के नाम से भी जाना जाता है , इसलिए ये तय है इसका जवाब पाने में बहुत अधिक समय लगेगा और कई सौ पीढ़िया इसमें बीत जाएगी इतने सालो में ऐसा भी हो सकता है पृथ्वी का अस्तित्व न रहे .

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