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19 November 2018

भारत कि महान बेटी कल्पना चावला - जिसने अन्तरिक्ष तक पहुंचकर भारत का मान बढाया

कल्पना चावला हरियाणा के करनाल से थी . इन्होने 19 नवम्बर के दिन ही भारत कि पहली महिला अन्तरिक्ष यात्री होने का गोरव हासिल किया था . ये अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्री थी और अन्तरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी . कल्पना का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था और इनकी मृत्यु 1 फ़रवरी 2003 को हुई थी ये " कोल्बिया अन्तरिक्ष यान आपदा " में मारे गये सात लोगो में शामिल थी .


कल्पना चावला कि प्रथम अन्तरिक्ष यात्रा STS 87 कोलम्बिया शटल द्वारा 19 नवम्बर 1997 से 5 दिसम्बर 1997 के मध्य संपन्न हुई थी . उनकी दूसरी और आखरी अन्तरिक्ष यात्रा 16 जनवरी 2003 को कोलम्बिया स्पेस शटल से शुरू हुई थी परन्तु दुर्भाग्यवश 1 फ़रवरी 2003 को कोलम्बिया स्पेस शटल पृथ्वी पर लेंड करने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमे कल्पना समेत सात लोग मारे गये  थे .



कल्पना चावला के पिता का नाम बनारसी लाल चावला और माता संज्योती है . कल्पना अपने चार भाई - बहिनों में सबसे छोटी थी . इन्होने प्रारम्भिक शिक्षा करनाल के एक स्कूल " टेगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल " में प्राप्त की . मित्रो कल्पना चावला को बचपन से ही एरोनाटिक इंजिनियर बनने का शौक था . उनके पिताजी बनारसी लाल उनको डॉक्टर या शिक्षिका बनाना चाहते थे परन्तु इन्होने तो बचपन से ही बड़े सपने देखने शुरू कर दिए थे .
कल्पना चावला बायोग्राफी के लिए इमेज परिणाम

अपने सपने को साकार करने के लिए कल्पना चावला ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ में ‘एरोनौटिकल इंजीनियरिंग’ पढने के लिए ‘बी.इ.’ में दाखिला लिया और सन 1982 में ‘एरोनौटिकल इंजीनियरिंग’ की डिग्री भी हासिल कर ली। इसके बाद कल्पना जी अमेरिका चली गयी और सन 1982 में ‘टेक्सास विश्वविद्यालय’ में ‘एयरोस्पेस इंजीनियरिंग’ में स्नातकोत्तर करने के लिए प्रवेश लिया। उनका यह  कोर्स सन 1984 को सफलतापूर्वक पूरा हो गया । उनके अन्तरिक्ष यात्री बनने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि उन्होंने सन 1986 में ‘एयरोस्पेस इंजीनियरिंग’ में दूसरा स्नातकोत्तर भी किया और उसके बाद कोलराडो विश्वविद्यालय से सन 1988 में ‘एयरोस्पेस इंजीनियरिंग’ विषय में पी.एच.डी. भी पूरा किया।



सन 1988 में उन्होंने नासा के ‘अमेस रिसर्च सेण्टर’ में ‘ओवरसेट मेथड्स इंक’ में बतौर उपाध्यक्ष कार्य करना शुरू किया। वहां उन्होंने वी/एसटीओएल में सीएफ़डी पर अनुसंधान किया। कल्पना चावला को हवाई जहाज़ों, ग्लाइडरों व व्यावसायिक विमान चालन के लाइसेंसों के लिए प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का दर्ज़ा हासिल था। उन्हें एकल व बहु-इंजन वायुयानों के लिए व्यावसायिक विमानचालक के लाइसेंस भी प्राप्त थे। सन 1991 में कल्पना चावला ने अमेरिका की नागरिकता ले ली और नासा एस्ट्रोनौट कोर्प के लिए आवेदन कर दिया। मार्च 1995 में उन्होंने नासा एस्ट्रोनौट कोर्प ज्वाइन कर लिया और उन्हें सन 1996 में पहली अन्तरिक्ष यात्रा के लिए चुन लिया गया।
कल्पना चावला बायोग्राफी के लिए इमेज परिणाम
बचपन कि तस्वीर
अपने पहली उड़ान में कल्पना चावला ने लगभग 1 करोड़ मील की यात्रा की (जो पृथ्वी के लगभग 252 चक्कर के बराबर था)। उन्होंने कुल 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताये। इस यात्रा के दौरान उन्हें स्पार्टन उपग्रह को स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी पर इस उपग्रह ने ठीक से कार्य नहीं किया जिसके फलस्वरुप इस उपग्रह को पकड़ने के लिए दो अंतरिक्ष यात्रियों विंस्टन स्कॉट और तकाओ दोई को अंतरिक्ष वाक करना पड़ा। इस गड़बड़ी की वजह जानने के लिए नासा ने 5 महीने तक जांच की जिसके बाद यह पाया गया कि यह गड़बड़ी कल्पना के वजह से नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर इंटरफ़ेस और फ्लाइट क्रू और ग्राउंड कण्ट्रोल के कार्यप्रणाली में खामियों के वजह से हुई थी। उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा (एसटीएस-87) के बाद इससे जुड़ी गतिविधियाँ पूरी करने के बाद कल्पना चावला को एस्ट्रोनॉट कार्यालय में ‘स्पेस स्टेशन’ पर कार्य करने की तकनीकि जिम्मेदारी सौंपी गयी।

सन 2002 में कल्पना को उनके दूसरे अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया। उन्हें कोलंबिया अंतरिक्ष यान के एसटीएस-107 उड़ान के दल में शामिल किया गया। कुछ तकनीकी और अन्य कारणों से यह अभियान लगातार पीछे सरकता रहा और अंततः 16 जनवरी 2003 को कल्पना ने कोलंबिया पर चढ़ कर एसटीएस-107 मिशन का आरंभ किया। उड़ान दल की ज़िम्मेदारियों में शामिल थे लघुगुरुत्व प्रयोग जिसके लिए दल ने 80 प्रयोग किए और जिनके जरिए पृथ्वी व अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत तकनीक विकास व अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य व सुरक्षा का भी अध्ययन किया गया। कोलंबिया अन्तरिक्ष यान के इस अभियान में कल्पना के अन्य यात्री थे- कमांडर रिक डी. हस्बैंड, पायलट विलियम सी मैकूल, कमांडर माइकल पी एंडरसन, इलान रामों, डेविड एम ब्राउन और लौरेल क्लार्क।

"कोलंबिया अंतरिक्ष यान" हादसा और कल्पना चावला की मृत्यु

भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। अपने सभी अनुसंधान के उपरांत वापसी के समय कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल मे प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया और देखते ही देखते अंतरिक्ष यान और उसमें सवार सातों यात्रियों ख़ाक हो गए। नासा ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिये यह एक दर्दनाक घटना थी।

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