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26 December 2018

श्रीराम , लक्ष्मण , सीतामाता और अन्य अयोध्या वासियों कि मृत्यु कैसे हुई आइये जानते है

भगवन राम ( Ram ) कि मृत्यु का पढ़कर आपने सोचा होगा कि राम तो भगवान् थे और भगवान कि मृत्यु कैसे हो सकती है पर मित्रो एक सत्य यह भी है कि इस धरती पर जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निशिचत है .रामायण के अनुसार भगवान विष्णु ने लकापति रावण का वध करने के लिए श्रीराम के रूप में मनुष्य अवतार लिया था. इस कारण उनको अपना मनुष्य रुपी शरीर को त्यागना ही था . भगवान श्रीराम और उनको भाइयो और उनके साथियों ने किस प्रकार अपना देह त्याग किया था आज इस लेख में हम आपको बतायेंगे

कैसे हुई माता सीता की मृत्यु ( How did the death of mother Sita )

भगवान श्री राम ( Sri Ram ) का रावण के वध के साथ ही वनवास पूरा हो गया था . इसके बाद भगवान राम लंका नहीं गये और अयोध्या आकर राजा बने और सब कुछ शांति पुर्वक चलने लगा . कुछ समय बाद एक घटना घटी - अयोध्या ( Ayodhya ) राज्य के एक धोबी था उसकी पत्नी एक रात किसी कारणवश बाहर रह गयी थी जब वह दुसरे दिन घर आई तो धोबी ने उसको त्याग दिया और कहा कि वह कोई राजा राम नहीं है

जो दुसरे राज्य में रहकर आई अपनी पत्नी सीता को रख ले यह बात जब श्रीराम ( Sri Ram ) के पास पहुंची तो उनको अपना राजधर्म याद आया और राजधर्म ( Monarchy ) के नियमानुसार अपनी गर्भवती ( Pregnant ) पत्नी सीता का त्याग कर दिया . भगवान श्रीराम ( Sri Ram ) जानते थे कि सीता पवित्र है फिर भी उनको राजधर्म के लिए ऐसा करना पड़ा .लक्ष्मण जी सीता जी एक घने वन में छोड़ कर आ गये , जहाँ सीता जी महाऋषि वाल्मीकि कि शरण ली और कुछ समय बाद अपने दो पुत्रो लव और कुश को जन्म दिया , इसके बाद सीता ( Sita ) लव-कुश को श्रीराम को सौंपकर धरती में शमा गई .

कैसे हुई भगवान लक्ष्मण की मृत्यु  ( How did Lord Laxman die? )
रामायण में ऐसा वर्णन है कि जब श्रीराम ( Sri Ram ) का धरती लोक पर समय पूरा हो गया तो स्वय काल उनके पास एक ऋषि ( Sage ) का वेश बनाकर आये थे . काल रुपी ऋषि ने भगवान श्रीराम से अनुरोध किया कि मुझे आपसे कुछ आवश्यक बात करनी है पर एक शर्त है इस समय आपके और हमारे बिच कोई ना आये और कोई आया तो उसे मृत्यु दंड देना होगा . उस समय श्रीराम के पास लक्ष्मण ( Laxman ) खड़े थे भगवान राम ने उनको आदेश कि दरबार के पहरेदारो को दूर भेज दो और तूम पहरा दो और ध्यान रहे हमारे बिच कोई ना आ पाए

जब लक्ष्मण उस कक्ष में से चले गये तो काल अपने प्रारम्भिक रूप में आये और उन्होंने श्रीराम ( Sri Ram ) को कहा कि मै काल हु भगवान ( God ) आपका धरती लोक पर समय पूरा हो गया है जितना आप तय करके आये थे मगर इसके बाद भी आपकी इच्छा है तो आप रह सकते है . जब ये बाते चल रही थी तो कक्ष के बाहर दुर्वासा ऋषि पधारते है और लक्ष्मण से कहते है मुझे श्रीराम से जरुरी बात करनी है तूम श्रीराम ( Sri Ram ) से कहो कि मुझसे जल्दी मिले , तब लक्ष्मण ने दुर्वासा ऋषि को कहा आप थोड़ा इंतजार करें भैया अभी दुसरे काम में व्यस्त है आपसे जल्द ही मिलेंगे ,

 इस पर दुर्वासा ऋषि क्रोधित हो जाते है और कहते है मै अयोध्या को ऐसा श्राप दूंगा कि पूरी अयोध्या नष्ट हो जाएगी . तभी लक्ष्मण जी ने दुर्वासा ऋषि से माफ़ी मांगी और अपने मन में सोचा कि अयोध्या को बचाने के लिए मेरी जान जाये तो इसमें कोंनसी बुरी बात है इसके बाद लक्ष्मण श्रीराम के पास में जाते है जहाँ काल और श्रीराम के बीच वार्तालाप ( Conversations ) हो रहा था . यह देखकर काल वहां से ध्यान मग्न हो गये और लक्ष्मण ने श्रीराम ( Sri Ram ) को दुर्वाशा ऋषि के आने का सन्देश दिया . श्रीराम दुर्वासा ऋषि का सत्कार (   hospitality ) करते है 
जब दुर्वासा ऋषि चले गये तो श्रीराम को काल को दिया अपना वचन याद आया जिसमे अब लक्ष्मण जी को मृत्यु दंड ( Capital punishment ) देना था क्योंकि वो उस कक्ष में लोट आये थे जहा श्रीराम और काल वार्तालाप कर रहे थे .
लक्ष्मण जी को मृत्यु दंड का सोचकर श्रीराम परेशान हो जाते है तभी ऋषि वशिष्ठ ने श्रीराम से कहा कि आप लक्ष्मण का त्याग कर दो यह मृत्यु दंड के समान ही होगा क्योंकि किसी साधू पुरुष का त्याग करना मृत्यु के समान ही दंड होता है और श्रीराम लक्ष्मण का त्याग कर देते है . लक्ष्मण जी सरयू नदी के किनारे जाकर अपनी सभी इन्द्रियों ( senses ) को एक साथ वश में करके अपना देह त्याग करते है

भगवान श्रीराम की मृत्यु कैसे हुई ( How did Lord Shriram die )

अब श्रीराम ( Sri Ram ) ने भी धरती लोक से जाने का निश्चय किया यह सन्देश जब विभिन्न क्षेत्रो में पहुंचा तो विभिक्ष्ण हनुमान जी , सुग्रीव के साथ पूरे वानर गण वहा पहुँचते है और श्रीराम ( Sri Ram ) के साथ देह त्याग करने का निश्चय करते है श्रीराम ने हनुमान विभिक्षण सहित पांच लोगो को देह त्यागने से मना कर दिया था .

 इसके बाद श्रीराम , सभी वानर गण और अयोध्या वासी सरयू नदी के किनारे आ गये और इसमें प्रवेश किया . इस तरह श्रीराम ने अपनी देह का त्याग किया था .

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