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27 November 2018

महिलाओ के लिए सबसे खतरनाक जगह उनका घर - रिपोर्ट


सयुक्त राष्ट्र संघ ने एक ताजा अध्ययन किया है जिसके अनुसार भारत में कानून होने के बावजूद महिला हत्याओ के मामले बढ़ ही रहे है इनमे सबसे प्रमुख दहेज़ से जुड़े मामले है . इस अध्ययन में बताया गया कि महिलाओ के लिए सबसे खतरनाक जगह उनका घर है . मादक पदार्थ एंव अपराध पर सयुक्त राष्ट्र कार्यालय ( UNODC ) कि और से प्रकाशित नए अनुसंधान के अनुसार पिछले वर्ष पुरे विश्व में लगभग 87000 महिलाओ को मौत के घाट उतार दिया गया . इनमे से करीब 50000 या 58% कि मौत उनके साथियों या उनको परिवारजनों के हाथो हुई थी . इस रिपोर्ट कि माने तो हर घंटे करीब 6 महिलाये अपने परिजनों के हाथो मारी जाती है .

सन 1995 से 2013 के आकडे देखे तो भारत में वर्ष 2016 में महिला हत्या डर 2.8 प्रतिशत थी जबकि केन्या ( 2.6 ) अजरबैजान (1.8) जॉर्डन ( 0.8 ) और ताजनिया ( 0.4 ) रही थी अर्थात भारत में महिला हत्या डर अधिक थी . इसके अलावा भारत में 15 से 49 वर्ष कि उम्र कि 33.5 प्रतिशत महिलाओ और लडकियों ने तथा पिछले एक साल में 18.9 प्रतिशत महिलाओ ने अपने जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का सामना किया .

भारत में दहेज़ से जुड़े मौत के मामले हमेशा से चिंता का विषय रहे है इस अध्ययन में बताया गया है कि राष्ट्रिय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से प्राप्त आकड़ो से यह पता चलता है कि दहेज़ से समन्धित हत्या के मामले महिलाओ कि हत्या के सभि९ मामलो में से 40 से 50 प्रतिशत है और इनमे 1999 से 2016 के दौरान एक स्थिर परिवृति देखि गई .  इसके अनुसार भारत सरकार द्वारा 19६१ में कानून लाने के बावजूद दहेज़ के मामले कम नहीं हुए है . ये मामले देशभर से सामने आ रहे है और दहेज़ हत्या के मामले सबसे अधिक सामने आये है .


अफ्रीका एशिया और प्रसान्त क्षेत्र और इसके आस पास में रहने वाली महिलाये जादू-टोना के आरोप से भी प्रभावित होती है और ये लेंगिग समन्धि हत्यायो का कारण भी हो सकते है . पापुआ न्यू गिनी और भारतीय उप महाद्वीप से मामलो को देखकर यह कहा जा सकता है कि इस तरह के मामले अभी भी कम नहीं हुए है  . यह रिपोर्ट महिलाओ के खिलाफ हिंसा ख़त्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर जारी कि गई थी

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