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22 November 2018

आज है देश कि पहली महिला डॉक्टर का जन्मदिवस - करना पड़ा था दुनिया से समझोता

मित्रो आज का दिन हमारे लिए बहुत ही गर्व का दिन है क्योंकि आज के दिन यानि 22 नवम्बर 1864 को भारत कि पहली महिला डॉक्टर रुकमा बाई का जन्म हुआ था . रुकमा बाई उस समय डॉक्टर बनी थी जब भारत में महिलाओ के लिए कोई अधिकार नहीं थे और भारत अंग्रेजो का गुलाम था . और समाज का एक तबका महिलाओ इस तरह बाहर निकलकर काम करने के पूरी तरह विरुद्ध था . मित्रो आज इनके जन्म दिवस पर हम इनके संघर्ष कि अनकही कहानी आपके साथ शेयर कर रहे है -


रुकमा बाई सन 1894 में देश कि पहली महिला डॉक्टर बनी थी इनके सघर्ष के कारण ही भारत में 1891 में ऐज ऑफ़ कांसेप्ट एक्ट 1891 कानून पास हुआ था जिसके अनुसार शादी करने कि उम्र तय कि गयी थी .
रुकमा बाई कि माता का नाम जयंती बाई था . जब जयंती बाई केवल 15 साल कि थी तब रुकमा बाई का जन्म हुआ था और इसके 2 साल बाद यानि 17 साल कि उम्र में जयंती बाई विधवा हो गयी थी . इसके बाद जयंती बाई ने सखाराम अर्जुन से दूसरी शादी कि ये समाज सुधारक और मुंबई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज में बोटनी के प्रोफ़ेसर थे . रुकमा बाई कि शिक्षा में उनके पिता यानि सखाराम अर्जुन का महत्वपूर्ण योगदान रहा था .


बाल विवाह को रोकने का महत्वपूर्ण प्रयास

रुकमा बाई जब महज 11 साल कि हुई थी तब इनका विवाह बड़े  भीकाजी से कर दिया गया था शादी के बाद भी वह अपने माता के साथ रहती थी . 1884 में रुकमा बाई के पति भीकाजी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में पति का पत्नी पर वैवाहिक अधिकार का हवाला देकर याचिका दायर कि जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने रुकमा बाई को पति के साथ रहने या जेल जाने का आदेश दिया . जिसको इन्होने अस्वीकार किया और कहा मै उस विवाह को स्वीकार नहीं करती , क्योंकि उस समय ऐसे निर्णय लेने में मै असमर्थ थी . इस वाक्य के बाद ही लोगो का ध्यान महिला के अधिकारों और बाल विवाह कि और गया था .



रुकमा बाई ने "लन्दन स्कूल ऑफ़ मेडीसन फॉर वुमन" इंग्लेंड में अध्ययन किया था शिक्षा पूरी होने के बाद वो भारत लोट आई 1894 में इन्होने सूरत में पहली महिला डॉक्टर का पदवार संभाला था . इन्होने इस पेशे को तकरीबन 35 साल किया था . रुकमा बाई ने दुबारा कभी शादी नहीं की और पूरे जीवन समाज सुधारक के तौर पर कार्य करती रही . 25 सिंतबर 1955 में 91 साल कि उम्र में इनका निधन हो गया था .

मित्रो इस पोस्ट को शेयर जरुर करे और हर भारतीय के पास इस महान शख्सियत कि जीवनी को पहुंचाए . यह लेख आपको कैसा लगा इस बारे में अपने विचार कमेंट में लिखे .

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