माँ भारती

Maabharati: A Hindi knowledge Sharing website, Legends of Mahatmas, Technologies, Health, Today History, Successful People's stories and other information.

Breaking

09 December 2018

कांग्रेस को मुश्किलो से निकालकर बुलंदी तक पहुंचाने वाली सोनिया की सफ़र

भारतीय राजनेता और राष्ट्रिय कांग्रेस कि अध्यक्ष रही श्रीमती सोनिया गाँधी का जन्म 9 दिसम्बर 1946 में हुआ था . वे 14 वीं लोकसभा में यूपीए कि अध्यक्ष भी रही थी और कांग्रेस कि सबसे लम्बे समय तक अध्यक्ष रही है ऐसा कांग्रेस के 132 सालो में पहली बार हुआ है . इटली राष्ट्र के गाँव लुसिआना के एक छोटे से गाँव में जन्मी सोनिया गाँधी का जीवन बहुत ही अजीब रहा है आइये जानते है



सोनिया गाँधी का राजीव गाँधी से विवाह होने से पहले एंटोनियो मायनो था इनके पिता स्टेफिनो मायनो और माता पाओलो मायनो थी सोनिया कि दो बहनों भी है . 1964 में सोनिया गाँधी केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में बैल शेक्षणिक निधि के भाषा विद्यालय में अंग्रेजी भाषा का अध्ययन करने गयी यहाँ उनकी मुलाक़ात राजीव गाँधी से हुई जो उस समय ट्रिनिटी कॉलेज केम्ब्रिज में पढ़ते थे . राजीव और सोनिया कि मुलाक़ात एक रेस्तरा में हुई थी .


वार्सिटी रेस्टोरेंट का मालिक चार्ल्स एंटोनी बताते है कि "एक दिन सोनिया रेस्तरा में आई और यह लंच का समय था मेरे पास उनके लिए खाली जगह नहीं थी और राजीव अकेले ही बैठे थे तो मेने उनसे कहा कि एक लड़की को तुम्हारे पास बैठाने से तुम्हे कोई एतराज तो नहीं है . इस पर राजीव ने कहा कोई बात नहीं बेठ सकती है और दोनों कि इस मुलाक़ात हुई दोनों में प्यार हो गया . इसमें राजीव कि कोई गलती नहीं क्योंकि सोनिया बहुत ज्यादा खुबसूरत थी ".


इसको जल्द ही मान्यता नहीं मिली क्योंकि सोनिया एक साधारण परिवार से थी और राजीव प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी के बेटे थे हालांकि सोनिया के पिता को भी यह रिश्ता मंजूर नहीं था उन्होंने तो शादी के लिए भी मना कर दिया था क्योंकि वे एक अलग देश में अपनी बेटी को नहीं भेजना चाहते थे परन्तु राजीव और सोनिया के आगे सभी को झुकना पड़ा और 1968 में दोनों की शादी हो गई . सोनिया गाँधी का नाम परिवर्तन हुआ और वे भारत में रहने लगी . राजीव गाँधी केसाथ विवाह होने के कई वर्ष बाद सोनिया ने 1983 में भारत कि नागरिकता स्वीकार कि . उनकी अब दो संताने है एक पुत्र राहुल गाँधी और एक पुत्री प्रियंका वाड्रा .


राजीव गाँधी कि हत्या के बाद सोनिया गाँधी से राजनीती में आने के लिए कहा गया परन्तु उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया - मै अपना जीवन भीख मांगते हुए देख लुंगी पर राजनीती में नहीं आउंगी . और वे राहुल व प्रियंका का पालन पोषण करने लगी .

अब कांग्रेस कि सत्ता 1966 में चली गई थी और पार्टी को किसी नेहरु-गाँधी परिवार के सदस्य कि आवश्यकता महसूस हुई . इसके बाद 1997 में सोनिया गाँधी ने कोलकाता में कांग्रेस कि सदस्यता ले ली और 62 दिनों के बाद 1998 में वे कांग्रेस कि सदस्य बनी और उन्होंने कांग्रेस को विजयी बनाने कि असफल कोशिश की . परन्तु वीपक्ष ने उनका विदेशी होने का और सुस्पष्ट हिंदी नहीं बोलने का मुद्दा उठाया . पर सोनिया गाँधी अब कहा झुकने वाली थी .


इसके बाद 1999 में राजीव गाँधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी ( उत्तरप्रदेश ) और बेल्लारी ( कर्नाटक ) से चुनाव लड़ी और अच्छे बहुमत के साथ विजयी हुई 1999 में वे 13वीं लोकसभा में विपक्ष कि नेता के तौर पर चुनी गई .
2004 में चुनाव से पहले ऐसे ही कयास लगाये जा रहे थे कि अटल बिहारी वाजपेयी फिर से प्रधानमंत्री बनेगे परन्तु सोनिया गाँधी पूरे देश में घूमकर इन नतीजो को बदल दिया और 200 से ज्यादा सीटो पर जीत मिली . और वे स्वय रायबरेली उत्तरप्रदेश से सांसद चुनी गई .


अब वामपथी दलों ने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस का साथ दिया और कांग्रेस सत्ता में आ गयी 16 मई 2004 को सोनिया गाँधी को 16-दलीय गठबंधन कि नेता चुना गया और उनके प्रधानमंत्री बनाने बनाने पर मोहर लगी . सन 2004 में वे दुनिया की सबसे ताकतवर महिला के रूप में उनका नाम फोर्ब्स कि लिस्ट में आया .

परन्तु NDA के नेताओ ने उनके विदेशी होने का आलोप लगाया . सुषमा स्वराज व उमा भारती ने कहा कि अगर सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री बनती है तो वे सर मुडवा लेगी और जमीन पर सोएगी . 18 मई को प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह को उम्मीदवार बना दिया और उनका प्रचार किया और स्वय इस दावेदारी से हट गयी इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और सोनिया गाँधी गठबंधन कि नेता चुनी गई . 2 अक्टूबर 2007 को इन्होने सयुक्त राष्ट्र संघ को संबोधित किया था .  2007 में सोनिया गाँधी का फोर्ब्स कि सबसे पावरफुल महिलाओ में सातवाँ स्थान आया .


सोनिया गाँधी ने कभी भी भारत कि प्रधानमंत्री बनने का नहीं सोचा था अगर ऐसा होता वे प्रधानमंत्री बन सकती थी


मई 2009 में वे रायबरेली उत्तरप्रदेश से एक बार फिर सांसद चुनी गई और अपने प्रतिद्विंदी को चार लाख से भी ज्यादा वोटो से मात दी . और कांग्रेस की सरकार बनी और सोनिया एक बार फिर गठबंधन की नेता चुनी गई . और मनमोहन सिंह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने इस समय कांग्रेस ने 206 सीटे अपने नाम कि थी जो अब तक के इतिहास में एक रिकॉर्ड था . 2010 कि फोर्ब्स लिस्ट में 9 और 2012 की फोर्ब्स लिस्ट में वे 21 वें नबर पर रही . यहाँ से हम अनुमान लगा सकते है इनकी लोकप्रियता कम होती गई .

सन 2014 के आम चुनावो में सोनिया गाँधी तो रायबरेली से सांसद चुनी गई परन्तु वे कांग्रेस और युपीए को सत्ता न दिला सकी कांग्रेस को 44 और यूपीए गठबंधन को 59 सीटे मिली.

सोनिया गाँधी को लिखने बहुत शौक है और उन्होंने "ट्रिस्ट विथ इंडिया " और 'टू टूगेदर" नाम कि दो पुस्तके लिखी है . रानी सिंह नाम की लेखिका ने उनके जीवन पर एक किताब " एन एक्स्ट्रा ओडिनरी लाइफ एन इंडियन डेसिटनी " लिखी है . 

No comments:

Post a Comment

माँ भारती का नया लेख अपने ईमेल में पाए

जिस ईमेल में आप माँ भारती का नया लेख पाना चाहते है वह नीचे बॉक्स में इंटर करे:

Delivered by माँ भारती