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29 December 2018

कई राजाओ को बर्बाद करने वाले कोहिनूर की दिलचस्प कहानी

कोहिनूर हिरा दुनिया में जिस भी राजा के पास गया उसको पूरी बर्बाद ही कर डाला है जितनी कोहिनूर कि सुन्दरता है उससे कही ज्यादा यह अभिशापित है, कोहिनूर का अर्थ " रौशनी का पहाड़ होता है आइये जानते है इसके इतिहास के दिलचस्प किस्से -

ऐसा माना जाता है कि कोहिनूर ( Kohinoor ) वर्तमान भारत के आंध्रप्रदेश प्रान्त के गुटुर जिले में स्थित गोलकुंडा कि खादानो ( Khanoo ) से मिला था. परन्तु यह कब मिला इसके कोई भी सबूत नहीं है, इसके अलावा एक कहानी यह भी बताती है कि कोहिनूर 3200ई.पू. हिरा नदी के तली में मिला था.


हालाँकि भारत कि गोलकुंडा कि खादानो से कई बेशकीमती हीरे प्राप्त हुए है जैसे - दरियाई नूर, ग्रेट मुग़ल ( Great Mughals ), आगरा डायमंड ( Agra diamond ), ब्रोलिटी ऑफ़ इंडिया ( Brolity of india ) और ऐसे ही न जाने कितने हीरे यहाँ से मिले है इसलिए कोहिनूर को भी यहाँ से प्राप्त हुआ माना जाता है , पर यह कितना सच है यह हमें इतिहास के वो पन्ने बता सकते है जो कोहिनूर के प्राप्त होने के समय लिखे गये थे पर दुर्भाग्यवश वो हमें नहीं मिले है. कोहिनूर कि आज कई कहानिया परचलित है जिसमे से एक हम आज पेश कर रहे है पर यह कितनी सच है ये तो इतिहास ही बयान कर सकता है .
Kohinoor

1306 में कोहिनूर एक ज्योतिषी ( Astrologer ) के हाथ में आया और उसने कहा कि जो इसको पहनेगा वह संसार पर राज करेगा परन्तु इसके साथ ही उसका दुर्भाग्य भी शुरू हो जायेगा क्योंकि यह हिरा अभिशापित ( Cursed ) है. अगर कोहिनूर के इतिहास को देखे तो यह बात पूरी तरह सच होती है. जिसने इसको पहना वो दुनिया पर राज जरुर किया पर कुछ ही समय में उसका पतन भी हो गया चाहे हम मुगलों को देख ले , या अंग्रेजो को सब जगह यह भविष्यवाणी ( Prediction ) सच होती है.


कोहिनूर का नामकरण नादिरशाह ने किया था जिसका अर्थ कोह-इ-नूर ( Koh-i-Noor ) यानि " रौशनी का पहाड़ होता है. यह हिरा 14वीं शताब्दी के प्रारम्भ में काकतीय वंश के पास था और उनसे तुगलक शाह ने कोहिनूर को छीन लिया था. जैसे ही यह मुग़ल साम्राज्य के पास आया इनके बुरे दिन शरू हो गये थे. इतिहास कि कहानिया वर्णन करती है कि इस हीरे को शाहजहाँ ने अपने सिहासन पर लगवाया था कुछ समय बाद ही उसकी पत्नी कि मृत्यु ( death ) हो गयी और शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने इनको नजरबन्द कर लिया था.
शाहजहाँ का सिहासन

ओरंगजेब ( Aurangzeb ) ने इसकी सुन्दरता जो और अधिक बढाने के लिए इसको एक जौहरी ( Jeweler ) को दिया. उस जौहरी के हाथ से गिरने से इसके कई टूकड़े हो गए और यह 793 कैरेट की जगह 186 कैरेट का ही रह गया था आप अनुमान लगा सकते है कि कोहिनूर ( Kohinoor ) को कितना नुकसान हुआ होगा ?
नादिरशाह

कुछ समय बाद ही फारसी शासक नादिरशाह ने मुग़ल सल्तनत पर हमला करके कोहिनूर ( Kohinoor ) को अपने कब्जे में ले लिया और इसका नामकरण किया था जिसका वर्णन हम ऊपर कर चुके है. इसके कुछ बाद नादिरशाह कि भी हत्या हो गयी और अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह दुरानी इसे अपने देश ले आये बताया जाता है कि अहमद शाह दुरानी को भी सत्ता से हाथ धोना पड़ा और वह अफगानिस्तान से भागकर लाहोर महाराजा रणजीत सिंह ( Maharaja Ranjit Singh ) के पास आया और उनको कोहिनूर भेंट सवरूप दे दिया. बदले में रणजीत ने अहमद शाह दुर्रानी को वापिस अफगानिस्तान दिला दिया था.


महाराजा रणजीत सिंह उस समय के सबसे बड़े और अजय राजा थे परन्तु कोहिनूर ( Kohinoor ) के आते ही उनके भी बुरे दिन शरू हो गये थे. दरअसल उनको लकवा मार गया था जिसके बाद वे ठीक नहीं हो सके और दुनिया से चल बसे. उन्होंने अपनी वसीयत लिखवाया था कि कोहिनूर को उड़ीसा राज्य के एक मंदिर में दान स्वरूप दे दिया जाए पंरतु रणजीत सिंह के बाद अंग्रेजो ने 1849 में सिख साम्राज्य पर कब्ज़ा कर लिया और कोहिनूर को अपने कब्जे में ले लिया लार्ड डलहौजी इसको छुपाकर ब्रिटेन ले गया और सन 1850 को महारानी विक्टोरिया को खुश करने के लिए यह उपहार स्वरूप दे दिया गया. ब्रिटेन कि महारानी को इसकी कटिंग पसंद नहीं आई और उन्होंने इसकी दोबारा से कटिंग करवाई जिसके बाद यह 105.6 कैरेट का रह गया था.
Maharaja Ranjit Singh

अग्रेजो के बारे में कहा जाता था कि इनका सूर्य कभी अस्त नहीं होता है परन्तु जैसे हो कोहिनूर ( Kohinoor ) इनके पास आया अंग्रेजो का भी पतन शुरू हो गया 1850 के आसपास यह आधे विश्व पर राज कर रहा था परन्तु इसके आते ही धीरे धीरे कई देश आजादी होते गये और ब्रिटेन छोटे से क्षेत्र में सिमट गया.  इतिहासकार यह भी बताते है कि इंग्लेंड कि महारानी ने सन 1852 में अपनी वसीयत में लिखवाया था कि कोहिनूर ( Kohinoor ) को कोई भी पुरुष नहीं पहनेगा सिर्फ महिलाये ही इसको पहन सकती है जिससे इसका श्राप नहीं लगेगा , पर यह तरीका भी काम नहीं आया और नतीजा आज आप देख सकते है.
Alexandra

 महारानी विक्टोरिया की मौत के बाद, कोहिनूर को, एडवर्ड-7 (Edward VII) की पत्नी महारानी एलेग्ज़ेंड्रा (Alexandra) के ताज़ में लगा दिया गया, जिसका इस्तेमाल 1902 में उनके राज्याभिषेक में किया गया। वर्तमान में यह हीरा इंग्लेंड कि ही महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज की सोभा बढ़ा रहा है.


आज भारत में भी कई लोग कोहिनूर ( Kohinoor ) को भारत वापिस लाने की मांग कर रहे है ये लोग वहीँ जो इसका इतिहास नहीं जानते है. पर भारत अकेला नहीं है जो इस पर अपना हक़ जता रहा है. वर्ष 1976 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री जिम कैलेघन को कोहिनूर ( Kohinoor ) पाकिस्तान को देने का अनुरोध किया था. इसके अलावा भी अफगानिस्तान के तालिबान शासक और ईरान ने भी इस पर अपना दावा किया है.

मित्रो ये थी कोहिनूर ( Kohinoor ) हीरे कि अजब गजब कहानी, अगर यह लेख पसंद आया है तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर करके हमारा हौंसला बढ़ा सकते है ताकि आपके लिए इतिहास कि ऐसी शानदार जानकारी पेश करते रहे. धन्यवाद

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