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Nathuram Godse biography, Last Speech, Photo, Book (hindi)

19 जून 1910 को पुणे के एक कस्बे में जन्मा नाथुराम गोडसे बचपन से ही अपने इरादों पर अटल रहने वाला शख्स था . इसने आजादी मिलने के एक के अंदर ही गाँधी जी कि हत्या कर दी थी 30 जनवरी 1948 को इन्होने गांधीजी के सिने में तीन गोलिया दागी थी कुछ ही समय में सब कुछ ख़त्म हो गया और बापू नहीं रहे . नाथुराम गोडसे ने गाँधी कि हत्या क्यों की , इनकी अतिम इच्छा क्या थी इस तरह के कई सारे सवालों के जवाब में हजारो लेख लिखे जा चुके है . आज हम आपके लिए इन सवालों में से उन 11 सवाल के जवाब लेकर आये है जिनको हर शख्स जानना चाहता है

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ये है वो ग्यारह  सवाल और इनके जवाब हमने नीचे विस्तार से बताये है - ( nathuram godse in hindi )



    कौन था नाथुराम गोडसे ? ( Who is Nathuram Godse )

    नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) का जन्म एक ब्राह्मण हिन्दू परिवार में हुआ था उसने स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए अपनी हाई स्कूल ( high school ) कि पढाई बीच में ही छोड़ दी थी . ऐसा दावा किया जाता है की नाथुराम गोडसे और इनके भाई राष्ट्रिय स्वंयसेवक संघ ( आरएसएस  , RSS ) से भी जुड़े थे बाद में ये अलग हो गये और इन्होने " हिन्दू राष्ट्रिय दल" के नाम से अपना अलग संगठन बना लिया था इसका मुख्य उद्देश्य आजादी के लिए लड़ना था .

    गोडसे को लिखना बहुत पसंद था इनके कई लेख और विचार समाचार पत्रों में छपा करते थे और इन्होने अपना खुद का भी समाचार पत्र निकाला था जिसका नाम " हिन्दू राष्ट्र " था . शुरू में गोडसे गाँधी का पक्का अनुयायी था . महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) ने जब अंग्रेजो के खिलाफ " नागरिक अवज्ञा आन्दोलन " शुरू किया तो इसमें गोडसे ने गाँधी का साथ ही नहीं दिया बल्कि बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था .

    नाथुराम ने अपना बचपन लडकियों की तरह क्यों बिताया था ?

    नाथुराम का सही नाम नथूराम ही था . इनका नाम रखने के पीछे भी एक लम्बी कहानी है . दरअसल नाथुराम के घर जितने भी लड़के पैदा हुए उनकी अकाल मृत्यु हो जाती थी . यह देखकर परिवार ने नथू को लडकियों कि तरह पाला और उनकी नथ भी पहनाई जाती थी . इसी नथ के कारण इनका नाम नथू हो गया था बस यह एक अंग्रेजी कि स्पेलिंग में गलती के कारण नाथुराम हो गया था

    नाथुराम गोडसे ने गाँधी को क्यों मारा ( Why Nathuram Godse Assassinated Gandhi )

    इस सवाल के कई सारे जवाब दिए जाते है हम कुछ संभावित कारण बता रहे है-

    नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) भारत ( india ) के बंटवारे का जिम्मेदार गांधीजी ( Gandhiji ) को मानता था उसने माना की गाँधी ( Gandhi ) हिन्दू और मुसलमानों के दिलो में अपनी जगह बनाने के लिए देश का बंटवारा कर दिया था . गोडसे को उस भी बुरा लगा था जब जिन्ना कश्मीर समस्या के बावजूद पाकिस्तान में गाँधी ( Gandhi ) के दौरे के लिए सहमती दी थी . उसको लगा था कि ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि गाँधी ( Gandhi ) मुस्लिमो के प्रति कुछ ज्यादा ही दया भाव दिखा रहे है वे हिन्दुओ कि और नहीं सोच रहे है .

    आजादी के बाद जब देश का बंटवारा हुआ था गोडसे और उसके साथी इसके विरोध में उतर आये थे . इसके खिलाफ उन्होंने कई प्लान बनाये थे और 3 जुलाई 1947 को गोडसे और उनके साथियो और तमान हिंदूवादी नेताओ ने शोक दिवस मनाया था .
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    कई पत्रकारों के लेख यह भी मानते है कि - कांग्रेस के सदस्यों ने पाकिस्तान को 55 करोड़ देने के वादे के बावजूद , ये रूपये नहीं देने का फैसला लिया था गाँधी ( Gandhi ) चाहते थे की कांग्रेस यह फेसला बदल दे , गाँधी ने इसके लिए आमरण अनशन कि भी धमकी दी थी नाथुराम गोडसे को लगता था गांधीजी मुस्लिमों के लिए ऐसा कर रहे है.

    नाथुराम गोडसे की अंतिम इच्छा क्या थी? Nathuram Godse's last wish?

    15 नवम्बर 1949 को नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) और नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई थी .जब उनको फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तो उनके एक हाथ में अखंड भारत का नक्शा और इसके साथ भगवत गीता ( bhagwat geeta ) थी और इनके दुसरे हाथ में एक भगवा झंडा था .

    गोडसे ने अपनी अतिम इच्छा के रूप में कहा की मेरे शरीर के एक हिस्से को संभालकर रखा जाये और जब अखंड भारत का निर्माण हो जाए तो सिन्धु नदी में मेरी अस्थियो को प्रवाहित किया जाए और इसमें दो चार पीढ़िया लग जाए तो भी मुझे कोई एतराज नहीं है .नाथुराम की फांसी के बाद उनका शव परिवार को नहीं सौंपा गया और इनका अंतिम संस्कार गुपचुप तरीके से सरकार द्वारा कर दिया गया और इनकी अस्थियाँ परिवार को सौंप दी गयी . गोडसे के परिवार ने इनकी अंतिम इच्छा की लाज रखी और इनकी अस्थिया आज भी एक चांदी के कलश में रखी हुई है .



    कितनी बार हुई गाँधी की हत्या की कोशिश? How many attempts to assassinate Gandhi?

    गाँधीजी ( Gandhiji ) की हत्या ( murder ) कि असफल कोशिशो और उनकी हत्या ( murder ) के बिच एक सबंध रहा है . महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi ) कि हत्या से पहले इस तरह के पांच प्रयास हो चुके थे . पहली कोशिश 25 जून 1934 को पूना में हुई , दूसरी जुलाई 1944 में पंचगनी , तीसरी सिंतबर 1944 को सेवाग्राम में , चौथी साजिस 19 जून 1946 को वेस्टर्न घाट में कारजाट या खान्दला में से कही हुई थी और इसके पांचवीं कोशिश 20 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिरला हाउस में हुई थी .गाँधी कि हत्या की साजिस की जाँच करने वाले कपूर आयोग ने बताया था कि इनमे से पहली और चौथी साजिस कि ही जाँच हुई थी जिसमे गोडसे आप्टे और अन्य हिंदूवादी नेताओ का हाथ था .

    किसने थमाई थी नाथुराम गोडसे को पिस्तौल? Who gave the pistol to Nathuram Godse?

    जब नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) 20 जनवरी 1948 को महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi ) की हत्या करने में नाकाम रहा तो वह भागकर ग्वालियर चला गया . ग्वालियर में ही गोडसे ने हत्या के लिए जरुरी समान जुटाया और पिस्तौल ( pistal ) चलाने की प्रेक्टिस भी कि थी . इस बार गोडसे ने साथियो कि वजाय खुद गाँधी को मारने का Plan बनाया था . 
    ग्वालियर में हिन्दू संगठन चला रहे डॉ. डी. एस. परचुरे को एक अच्छी क्वालिटी कि पिस्टल ( pistal ) खरीदने के लिए कहा था . इन्होने ग्वालियर से पिस्टल इसलिए खरीदी क्योंकि सिंधिया रियासत में हथियार के लिए लाइसेंस कि जरुरत नहीं थी . गाँधी ( Gandhi ) कि हत्या वाले पिस्तौल को जगदीस गोयल से 500 रूपये में खरीदा गया था और यह सौदा परचुरे के जानकर गंगाधर दंडवते ने करवाया था .

    बापू की हत्या के बाद नाथुराम गोडसे को कोनसी जैल में रखा गया था ? (Nathuram Godse was kept in which gel)

    गोडसे को जिस जैल में रखा गया है यह चण्डीगढ़ से 40 और कसोली से 11 किलोमीटर दूर स्थित है  . आजादी से पहले अंग्रेजो ने इस जैल कई प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों को रखा था . इस जैल को अब म्यूजियम (British Meuseum ) बना दिया गया है और पंजाब और अन्य राज्यों से यहाँ कई पर्यटक आते है .
    इस जैल में केदियो को पहचान के लिए एक नंबर दिया जाता था जिसको दाग ए शाही कहा जाता था . इसको गरम सलाखों से कैदियों के माथे पर दागा जाता था .

    क्या गाँधी कि हत्या में आरएसएस कि भूमिका थी ? RSS's role in Gandhi's assassination?

    इस सवाल का जवाब सरदार पटेल ने अपने पत्र में नेहरु को दिया था जो इस प्रकार है -
    सरदार वल्लभभाई पटेल ने 27 फ़रवरी 1948 को नेहरु को एक पत्र लिखा जिसमे उन्होंने कहा कि आरएसएस नहीं है बल्कि विनायक दामोदर सावरकर के नेतृत्व वाली हिन्दू ( Hindu ) महासभा हत्या के षड्यंत्र की जिम्मेदार है ,

    आगे उन्होंने लिखा कि "यह सत्य है कि आरएसएस और हिन्दू महासभा ने गाँधी ( Gandhi ) कि हत्या पर मिठाई बांटी थी क्योंकि ये दोनों ही संघ उनके विचारों से असहमत थे परन्तु आरएसएस और हिन्दू महासभा के किसी अन्य सदस्य का इसमें कोई हाथ नहीं है. मतलब इसके जिम्मेदार नाथुराम गोडसे , गोपाल गोडसे ( Gopal Godse )  , विष्णु करकरे , नारायण आप्टे , विनायक दामोदर सावरकर , मदनलाल पाहवा , शंकर किष्टेया , दत्तात्रेय परचुरे थे इनके अलावा कोई और दिंगबर रामचद्र बडगे था जो बाद में सरकारी गवाह ( Approver ) बन गया था .

    जैल में गोडसे और देवदास गाँधी के बीच क्या बातचीत हुई थी ?

    नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) के भाई गोपाल गोडसे ने अपनी किताब में लिखा है कि नाथुराम की गिरफ्तारी के बाद गाँधी ( Gandhi ) के पुत्र देवदास गाँधी इनसे मिलने पहुचे थे तब नाथुराम ने इनको पहचान लिया और कहा की " मै नाथुराम विनायक गोडसे हु हिंदी अख़बार ( news ) "हिन्दू राष्ट्र" का संपादक . मै भी वहां था "जहाँ गाँधी कि हत्या हुई" आज तुमने मेरी वजह से अपने पिता को खोया है . मेरी वजह से तुम्हे दुःख पहुंचा हाउ और तुम पर व तुम्हारे परिवार पर जो दुःख पहुंचा इसका मुझे दुःख है . कृपया मेरा यकीन करो . मैंने यह काम किसी व्यक्तिगत रंजिश के लिए नहीं किया , न तो मुझे तुमसे को द्वेष है और ना ही खराब भाव ."
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    तब देवदास ने नाथुराम से कहाँ फिर तुमने ऐसा क्यों किया - तो उन्होंने कहा कि " केवल और केवल राजनितिक वजह से " . नाथुराम अपनी बात रखने के लिए देवदास से समय माँगा पर पुलिस ने इसमें ना कर दी .

    नाथुराम गोडसे का अदालत में  अंतिम बयान क्या था ? (Nathuram Godse Last Speech)

    नाथुराम गोडसे ( Nathuram Godse ) के अदालत में जो बयान दिए गये थे वो इस प्रकार है -




    पहली बयान - " वीर सावरकर और गांधीजी ( Gandhiji ) ने जो लिखा है या कुछ बोला है , उसे मैंने गंभीरता से पढ़ा है . मेरे विचार से , पिछले तीस सालो के दोरान इन दोनों ने ही भारतीय लोगो के विचार और कार्य पर जितना असर डाला है उतना किसी और चीज ने नहीं "
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    दूसरा बयान - " इनको पढने और सोचने के बाद मेरा यकीन इस बात में हुआ कि मेरा पहला दायित्व हिंदुत्व और हिन्दुओ के लिए बनता है, एक देशभगत और विश्व नागरिक होने के नाते . 30 करोड़ हिन्दुओ कि स्वतंत्रता और हितों कि रक्षा अपने आप में पूरे भारत की रक्षा होगी ,जहाँ दुनिया का प्रत्येक पांचवा शख्स रहता है . इस बड़ी सोच ने मुझे हिन्दू संघठन कि विचारधारा और कार्यक्रम के नजदीक किया . मेरे विचार से यही विचार धारा हिंदुस्तान को आजादी दिला सकती है और उसे कायम रख सकती है ."

    इसके बाद नाथुराम ने कहा " 32 साल तक विचारों में उत्तेजना भरने वाले गाँधी ( Gandhi ) ने जब मुस्लिमो के पक्ष में अपना अंतिम उपवास रखा तो मै इस नतीजे पर पहुंचा कि गाँधी ( Gandhi ) को जल्द ही ख़त्म करना होगा . हालाँकि गाँधी ( Gandhi ) ने अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगो को हक़ दिलाने कि दिशा में बढ़िया कार्य किया था , लेकिन जब वो हिंदुस्तान आये तो उनकी मानसिकता ऐसी हो गयी थी कि क्या सही , क्या गलत इसका फैसला लेने के लिए वो खुद को जज मानने लगे थे . 
    तीसरा बयान - " जब कांग्रेस के आला नेता गाँधी ( Gandhi ) कि सहमती से देश के बंटवारे का फेसला ले रहे थे , उस देश का जिसे हम पूजते है , मै भीषण गुस्से से भर रहा था . व्यक्तिगत तौर मेरी किसी से रंजिस नहीं थी लेकिन मै कहना चाहता हु कि - मै मोजुदा सरकार का सम्मान नहीं करता , क्योंकि उनकी नीतियाँ मुस्लिमो के पक्ष में ज्यादा है . लेकिन उसी समय मुझे साफ़ दिखाई दे रहा है कि ये सभी नीतियाँ केवल और केवल गाँधी के कारण थी "

    नाथुराम गोडसे के मुकदमें का दुर्लभ विडियो (Nathuram Godse Last Video)

    यह विडियो ( Video ) 27 मई 1948 का है जब गांधीजी ( Gandhiji ) कि हत्या के मुकदमे की सुनवाई शुरू हो रही थी . यह विडियो ऐतिहासिक क्लिप को संजोने वाली एक एजेंसी "ब्रिटिश पाथे" द्वारा Youtube पर जारी किया गया है
    यह विडियो ( Video ) चार मिनट का है जिसे अप्रैल 2014 में जारी किया गया था .

    1 comment:

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