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25 December 2018

जवाहरलाल नेहरु से जुड़े इन 10 सवालों के जवाब हर भारतीय शख्स जानना चाहता है

पंडित जवाहर लाल नेहरू ( jawaharlal nehru ) आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। जब वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने तब उनकी उम्र लगभग 58 वर्ष थी और वे 17 साल तक प्रधानमंत्री रहे। इनका जन्म इलाहाबाद में 14 नवंबर 1889 को हुआ था।  1942 में नेहरू समेत कई महान हस्तियां महाराष्ट्र की अहमदनगर जेल में बंद थीं। तीन साल का लंबा समय यहां गुजारा। नेहरू वक्त की कीमत जानते थे। यहाँ रहकर इन्होने डिस्कवरी ऑफ इंडिया नाम कि किताब लिखी थी । आइये जानते नेहरू से जुड़े वे सवाल जिनका जवाब जानने के लिए इस पेज पर आप पधारे है -


नेहरू से जुड़े 10 सवाल और इनके जवाब नीचे विस्तार से बताये गये है



जवाहरलाल नेहरु को सरदार पटेल कि जगह प्रधानमंत्री क्यों बनाया गया था ?

इस सवाल का जवाब पाने के लिए आजादी के पहले के इतिहास में जाना होगा जब 1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव हो रहा था . अध्यक्ष पद यह चुनाव आजादी से पहले अंतिम बार था और यह भी तय था कि जो प्रत्याशी इस समय कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा वो प्रधानमत्री बनकर देश का नेतृत्व करेगा . इस पद के लिए नामांकन भरने की अंतिम तारीख 29 अप्रैल 1946 थी .

इस समय 15 राज्यों के कांग्रेस की क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव करना था और इसमें मुख्य उम्मीदवार थे सरदार पटेल  ( vallabhbhai patel ) और जवाहरलाल नेहरु ( jawaharlal nehru ) . 15 राज्यों में से 12 राज्यों ने सरदार पटेल को समर्थन दिया और बाकी तीन राज्यों ने अपना मत किसी को भी नहीं दिया था . अब सभी यही मान रहे थे कि सरदार पटेल ( vallabhbhai patel ) कांग्रेस के अध्यक्ष होंगे और देश के पहले प्रधानमंत्री भी  . लेकिन गाँधी ( Mahatma Gandhi ) बीच में आये और सब कुछ धरा का धरा रह गया . सबके अरमान जैसे मिटटी में मिल गये हो . और जवाहरलाल नेहरु ( jawaharlal nehru )अध्यक्ष बन गये.
अब हमारे सामने सवाल यह उठता है कि गाँधी ने ऐसा क्यों किया -
महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi ) यह जानते थे कि जवाहरलाल नेहरु ( jawaharlal nehru ) प्रधानमंत्री और कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते है. अगर ऐसा नहीं होता है तो शायद कांग्रेस के दो टुकड़े हो जायेंगे ( यानि गाँधी सोच रहे थे कि नेहरु अलग जाकर पार्टी बना सकते है ). और जब कांग्रेस के दो हिस्से हो जायेंगे तो यह देश के लिए बुरा होगा और शायद अंग्रेज हमें आजाद भी ना करे . और अब तक कि हमारी सारी मेहनत खराब हो सकती है.


कुछ लोग दूसरा कारण यह भी मानते है कि- नेहरु पर अंग्रेजो को ज्यादा विश्वास था और वे इनकी वफादारी पर कभी भी शक नहीं करते थे इसलिए अंग्रेजो ने गाँधी ( Mahatma Gandhi ) के सामने शायद यह शर्त रखी हो कि अगर नेहरु ( nehru ) प्रधानमंत्री बनेगे तभी हम देश को आजाद करेंगे

अब हम नेहरु कि और चलते है जानते है उन्होंने क्या चाल चली -
नेहरु ( nehru ) को किसी भी राज्य ने समर्थन नहीं दिया था इसलिए उन्होंने एक चाल चली और कुछ गैर हिन्दु नेताओ के जरिये अपना नाम आगे बढ़ाया ताकि महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi ) को यह विश्वास हो कि नेहरु पर सभी धर्मो के लोग विश्वास करते है .हुआ ऐसा ही गाँधी को लगा कि सरदार पटेल ( vallabhbhai patel ) कि छवि अब भी कट्टरपंथी वाली है और वे अगर आगे देश के प्रधानमंत्री बनेगे तो देश में अशांति फैल सकती है जिससे देश को बड़ा नुकसान होगा . बस यही बड़े कारण यह जिनकी वजह से सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाए.

Extra जानकारी - इन्टरनेट पर चर्चित किताब वी नेहरू के लेखक मोतीलाल नेहरू थे.

नेहरु परिवार गाँधी परिवार कैसे बना ?

मित्रो हम आपको बता दे कि पूरा नेहरू परिवार गाँधी परिवार नहीं है.नेहरू परिवार कश्मीर से दिल्ली आया था उसके बाद इलाहाबाद आ गया. जवाहरलाल नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) के अलावा जो भी पहले नेहरु थे वे अब भी नेहरु ही है. तो अब हमारे सामने सवाल यह उठता है कि जवाहरलाल नेहरु का आगे का परिवार गाँधी परिवार ( Gandhi Family ) क्यों बन गया.

नेहरु के कोई लड़का नहीं था उनके सिर्फ एक लड़की इन्दिरा गाँधी थी जिन्होंने फिरोज गाँधी से विवाह कर लिया था. और हम जानते है कि महिला को अपने पति का सर नाम लगाना होता है इसलिए इन्दिरा नेहरु से इन्दिरा गाँधी बन गयी थी.  फिरोज के पिता पारसी और माता मुस्लिम थी , फिरोज का पूरा नाम फिरोज दारूवाला था ( जैसा कि विकिपीडिया पर है ) और जब फिरोज को महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi ) ने गोद ले लिया तो ये फिरोज गाँधी कहलाये थे. इनसे ही आगे का परिवार गाँधी परिवार हो गया.

क्या सुभाषचंद्र बोस कि हत्या में नेहरु का हाथ था ?

इस सवाल का जवाब सुब्रह्मण्यम स्वामी के बयान के आधार पर दिया गया है इसका कोई और जवाब हमें पूरे इन्टरनेट जगत में नहीं मिला , अब यह कितना सच आप इसको पढ़कर पता लगा सकते है माँ भारती  टीम इसके पूरी तरह सच होने का दावा नहीं करती है .

सितम्बर 2015 में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा था कि बोस ( subhash chandra bose ) कि हत्या में नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) का हाथ था . इन्होने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नेताजी को क्रिमिनल घोषित कर दिया गया था इसलिए उन्होंने एक फर्जी सुचना फेलाई कि नेताजी ( subhash chandra bose ) कि मृत्यु प्लेन क्रेस में हो गयी है . इसके बाद नेताजी रूस चले गये थे लेकिन वहां के तानाशाह स्टालिन ने उन्हें कैद कर लिया . बाद में नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) को इसकी सुचना भेज दी गयी थी. तो नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को इसकी सुचना दी कि आपका क्रिमिनल बोस रसिया में है . तो ब्रिटिश ने उनकी हत्या का आदेश दे दिया और उनकी कर दी गयी.


 ये स्वामी ने बताया कि उन दिनों नेहरु के स्टेनो मेरठ के रहने वाले श्यामलाल जैन थे. और श्यामलाल से नेहरु ने 26 अगस्त 1945 को आसिफ अली के घर पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री के लिए यह पत्र टाइप करवाया था. श्यामलाल ने ये बाते खोसला आयोग को बताई थी पर उनके पास सबूत नहीं थे.
अब एक सवाल स्वामी जी से - अगर सुभास चन्द्र बोस ( subhash chandra bose ) कि हत्या नेहरु ने करवा दी थी तो वो गुमनामी बाबा कौन थे.
सरदार पटेल ( vallabhbhai patel ) और नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) के बीच गहन मित्रता भी थी और कई जगह इनमे मतभेद भी था. आइये हम इससे जुड़े कुछ किस्से साझा करते है -
नेहरु ( vallabhbhai patel ) और पटेल के बीच विवाद कि शरुआत 1947 के आसपास जब हुई थी तब देश के कई हिस्से सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे दोनों ने ही बहुत कोशिश कि परन्तु नाकामयाब रहे. इस समय राजस्थान के अजमेर में भी बहुत दंगे हो रहे थे और पटेल ने यहाँ एक टीम को भेजा , कुछ समय बाद नेहरु जी ने भी अजमेर जाने का फैसला ले लिया. परन्तु अजमेर जाने से पहले नेहरु ने अपने सेक्रेटरी को वहां भेजा. पटेल ने इसका अर्थ निकाला कि नेहरु को गृह मंत्रालय के कामकाज पर भरोसा नहीं है.

पटेल ने नेहरु से कहा कि मुझे आपके सेक्रेटरी को अजमेर भेजने के फेसले पर आपति है. इसके जवाब ने नेहरु ने कहा कि प्रधानमत्री सरकार का मुखिया होता है वह चाहे जो कर सकता है. पटेल ( vallabhbhai patel ) इस बात पर भड़क उठे और उन्होंने कहा लोकतंत्र में प्रधानमत्री सबसे बड़ा नहीं होता है बल्कि वह बराबरी के लोगो में पहले नंबर का होता है . अब बात यहाँ तक बिगड़ गयी थी कि दोनों ने गांधीजी ( Mahatma Gandhi ) से कहा कि वो दोनों अब साथ नहीं रह सकते है और दोनों ने इस्तीफे की मांग कर दी. गाँधी ने दोनों से कहा कि तुम दोनों अपने पदों रहकर काम करो देश को तुम दोनों कि जरुरत है मै तुमसे अलग अलग मुलाक़ात करूँगा.

30 जनवरी 1948 को गाँधी ने सरदार पटेल ( vallabhbhai patel ) से प्राथना सभा में जाने से पहले मुलाक़ात कि और कहा देश में बहुत सारी चुनोतियाँ इसलिए तुम्हे और नेहरु ( Nehru ) को साथ चलने कि जरुरत है और कहां मै कल नेहरु से भी मिलूँगा. अब अफ़सोस नाथुरामगोडसे ने उनकी हत्या कर दी और गाँधी नेहरु के बीच बातचीत सम्भव नहीं हो पायी.
हालाँकि गांधीजी ( Mahatma Gandhi ) कि हत्या के बाद पटेल ( vallabhbhai patel ) और नेहरु किसी मित्र की सहायता से साथ आये और निर्णय लिया कि बापू ( Mahatma Gandhi ) कि सलाह के अनुसार हम साथ साथ काम करेंगे ताकि देश को कोई नुकसान न हो.

आजादी से पहले भी इनके बीच ऐसा ही मतभेद बना रहता था और कई बार अपने पद से इस्तीफा दे चुके थे और हर बार गांधीजी ( Mahatma Gandhi ) इनके बीच आते और साथ चलने का कह देते. अब दोनों ही नेता गांधीजी को अपना आदर्श मानते थे इसलिए इनको साथ आना पड़ता था.

लार्ड कर्जन भारत का 1899 से 1905 के बीच वायसराय था इस दौरान उसने भारत में बंगाल का विभाजन किया और जिन क्रांतिकारियों ने इसका विरोध किया उनको जैल में डाल दिया गया था. अथार्त अभिव्यक्ति कि आजादी को खत्म कर दिया.

जवाहर लाल नेहरु ( Jawaharlal Nehru ) देश के जब प्रथम प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने सविधान में पहला संशोधन किया और नौवी अनुसूची बनाई , अब इस अनुसूची में जब कोई भी कानून बनाकर डाल दिया जाता तो सुप्रीमकोर्ट भी उसको बदल नहीं सकता था इस प्रकार नेहरु ने " अभिव्यक्ति ककी आजादी को ख़त्म कर दिया. यह नियम हमेशा से विवाद का विषय रहा है.
लार्ड कर्जन और नेहरु दोनों का ही भारत चीन विवाद से गहरा रिश्ता रहा है. यह विवाद कर्जन ने शुरू किया था और नेहरु के समय युद्ध में बदल गया.

कई महीनो पहले सोशल मीडिया पर नेहरू जी ( Jawaharlal Nehru ) कि एक तस्वीर वायरल हो रही थी जिसके अनुसार नेहरु जी ने आरएसएस ( RSS ) के सम्मेलन में भाग लिया था यह एक facebook पेज " I support Doval पर सबसे पहले प्रकाशित कि गई थी

 इसके साथ लिखा था " बहुत मुस्किल से यह फोटो मिला है ये नेहरु जी है जो आरएसएस ( RSS ) कि शाखा में खड़े है ! अब बता भी दो कि क्या नेहरूजी भी भगवा आंतकवादी थे.

इस खबर कि हिंदी news चैनल news18 india ने जांच कि तो सच कुछ और ही सामने आया . इस चैनल ने बताया कि यह आरएसएस ( RSS ) कि नहीं बल्कि कांग्रेस के सेवा दल कि है और तस्वीर में खड़े नेहरु जी ही है .हम आपको बतादे कि सेवा दल को अग्रेजो से लोहा लेने के लिए " हिंदुस्तान सेवा दल " के नाम से 1924 में स्थापित किया गया था.

बाल दिवस ( children's day ) वर्ष 1925 में मनाया जाने लगा था. परन्तु सयुक्त राष्ट्र ने 20 1954 को ऐलान किया कि 20 नवम्बर को बाल दिवस ( children's day ) मनाया जायेगा. अलग अलग देशो में इसकी तारीख अलग-अलग है ,भारत 1964 तक 20 नवम्बर को ही बाल दिवस ( children's day ) मनाता था. पंरतु 27 मई 1964 को नेहरू कि मृत्यु के बाद उनके जन्मदिवस यानि 14 नवम्बर के दिन बाल दिवस मनाये जाए कि घोषणा हुई जिसको सभी ने समर्थन दिया. इसकी वजह नेहरू का बच्चो के प्रति प्यार और लगाव को बताया जाता है 

आज जब हम search engine जैसे google पर नेहरू कि मौत के बारे ( Nehru Death Reason ) search करते है सबसे पहले हमें फर्जी जानकारियाँ दिखाई देती है जैसे नेहरू अय्याश थे , लड्किबाज थे , और पता नहीं क्या- क्या  और सोशल मीडिया जैसे youtube पर कई विडियो दावा करते है कि उनकी मौत STD यानि सेक्सुअली ट्रांसमिटेद डिजीज के कारण हुई थी. और ज्यादा यहाँ हम ऐसी खबरों के बारे में आपको नहीं बतायेंगे क्योंकि आपने जरुर इनको पढ़ा होगा.


 आइये जानते है नेहरू कि मौत  ( Nehru Death Reason )का सच क्या है ?
1962 भारत चीन युद्ध के बाद नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) कि तबियत लगातार बिगड़ रही थी क्योंकि चीन को नेहरू एक सच्चा दोस्त समझते थे पर इस युद्ध ने इनको पूरी तरह तोड़ दिया था ऊपर से भारत कि हार और जले पर नमक छिडक गयी .1963 में नेहरू कश्मीर में रहे थे अपनी तबियत सुधारने के लिए इसके बाद कुछ दिन देहरादून में बिताये . मै 1964 में वे दिल्ली आ गये 26 तारीख तक उनकी तबियत में सुधार था.

परन्तु अगले दिन सुबह ही जब वे बाथरूम से आये तो पीठ में तेज दर्द होने लगा , डॉकटर्स कि टीम बुलाई गयी उन्होंने नेहरू से बात कि परन्तु नेहरू बेहोश हो गये और बेहोशी में उनकी मृत्यु हो गयी थी . लोकसभा में 27 मई 1964 को दोपहर 2 बजे इनकी मृत्यु का ऐलान किया गया और हार्ट अटैक मृत्यु का कारण बताया गया.

उस समय मीडिया के कई समाचार पत्रों में चिकित्सको के लेख छपे परन्तु किसी ने नहीं कहा कि नेहरू की मौत एसटीडी से हुई है. मित्रो ऐसी खबरों से दूर ये आपको गुमराह करते है ताकि हमारे देश भारत में अराजकता फैले.

ऑस्ट्रेलिया के पत्रकार नेविले मैक्सवेल भारत चीन युद्ध 1962 की रिपोर्ट के कुछ हिस्से अपनी वेबसाइट पर साझा किये थे  इस रिपोर्ट में जवाहरलाल नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) और उनकी सरकार के अधिकारियो को 1962 की हार का जिम्मेदार ठहराया गया है. हालाँकि ऑस्ट्रेलियन पत्रकार कि यह पुरानी है हम एक यूजर के सवाल के जवाब में हम आपसे यह साझा कर रहे है यह रिपोर्ट मार्च 2014 में भारत के कई मुख्य समाचार पत्रों में साझा कि गई थी.
इस रिपोर्ट में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री ( Jawaharlal Nehru ) के कार्यालय और रक्षा मंत्रालय की अपनी धारणा इस विचार पर आधारित करने के लिए आलोचना कि गई है कि चीनी युद्ध को बढ़ावा नहीं देंगे जबकि सैन्य तरीके से उन्हें इसके पूरी रह विपरीत सोचना चाहिए था . इस रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे बढ़ने कि निति में चीन के दावे वाले क्षेत्रो में सैन्य चौकिया बनाने आक्रामक गसत शुरू करने कि बात कही गयी थी. और इससे सघर्ष कि सभावना बढ़ गई .

धरा 370 ( Article 370 ) भारतीय सविधान का ऐसा कानून है जिसके अनुसार जम्मू & कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है . ऐसा अन्य राज्यों के साथ नहीं है . क्या है धारा 370 ( Article 370 ) और इसको नेहरू से क्यों जोड़ा जाता है इसका जवाब पाने के लिए आपको 1947 से शुरू हुई इस कहानी को पढना होगा

1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा ( Partition of India and Pakistan ) हो गया था तो कश्मीर के राजा हरिसिंह ने दोनों ही देशो के साथ जाने से मना कर दिया था. उसी समय पाकिस्थान के समर्थक कबीलाई ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया उसके बाद राजा हरिसिंह भारत के साथ आने के लिए राजी हो गये ताकि कश्मीर को पाकिस्थान से बचाया जा सके.  लेकिन भारत के पास इतना समय नहीं था कि कश्मीर को भारत में मिलाने कि ओपचारिकता पूरी कि जाए.

लेकिन इन कठिन परिस्थितियों को देखते हुए संघीय सविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) के सहयोगी गोपाल स्वामी आयंगर ने धारा 306A का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया यही आगे जाकर धारा 370 ( Article 370 ) बनी थी. इस धारा 306A को नेशनल कोंफ्रेस के नेता शेख अब्दुल्ला ने तैयार किया था. और जवाहरलाल नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) ने इसे लागू कर दिया जिससे महाराजा हरिसिंह को जम्मू कि गद्दी शेख अब्दुल्ला के हाथो सौंपनी पड़ी. यह सब बाते सरदार पटेल ( vallabhbhai patel ) को पता नहीं थी इसी धारा 370 ( Article 370 ) लागू होने के बाद दोनों कि दोस्ती में दरार आ गयी थी.


इस धारा को देश के पहले कानून मंत्री और सविधान निर्माता डॉ भीमराव आम्बेडकर ने भी इसे लागू करने से इनकार कर दिया था. लेकिन जवाहरलाल नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) ने इसे जबरदस्ती लागू कर दिया जिससे जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकार मिल गये जो नीचे आपके सामने पेश कर रहा हूँ.

  • जम्मू और कश्मीर ( jammu and kashmir ) के नागरिको के पास दोहरी नागरिकता होती है और यहाँ का राष्ट्र ध्वज भी अलग है.
  • अगर जम्मू कश्मीर ( jammu and kashmir ) में भारत के राष्ट्रिय ध्वज या राष्ट्रिय प्रतिको का अपमान किया जाये तो यह गुनाह नहीं होता है 
  • जम्मू कश्मीर ( jammu and kashmir ) की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षो का होता है परन्तु भारत अन्य राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है.
  • भारत के सुप्रीमकोर्ट के आदेश जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होते है.
  • भारत की संसद जम्मू और कश्मीर से जुड़े बहुत ही कम कानून बना सकती है.
  • जम्मू और कश्मीर ( jammu and kashmir ) की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य से विवाह कर ले तो इसको जम्मू कश्मीर कि नागरिकता गवानी पड़ती है.
  • कश्मीर में अल्पसंख्यको को 16% ( हिन्दू , सिख ) आरक्षण नहीं मिलता है 
  • अगर पाकिस्तान का कोई नागरिक कश्मीरी लड़की से शादी करले तो उसे भारतीय या जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है.
यह लेख इन्टरनेट ( Internet ) पर उपलब्ध जानकारियों के आधार पर है . हमने ये जानकारियाँ देश कि नामी न्यूज़ वेबसाइट से ली है और किसी भी अराजकता फैलाने वाली सामग्री को हमने हटाने कि पूर्णतया कोशिश कि फिर अगर कोई ऐसी सामग्री पायी जाती तो आप अवगत जरुर कराए हम इसको जल्द हटा देंगे. यह लेख लिखते समय हमने अभिव्यक्ति कि आजादी का ख्याल रखा है. हमने किसी भी पॉइंट तोड़ मरोड़कर पेश नहीं किया जिससे नेहरू जैसी महान शख्सियत का नाम बदनाम किया जाए. हमने इसमें किसी भी सोशल साईट जैसे YouTube , Facebook , Google Plus , WhatsApp से कोई भी जानकारी हासिल नहीं कि है क्योंकि यहाँ जानकारी कम गुमराह ज्यादा किया जाता है , हमारे लिए आपको जानकारी देना अनिवार्य है इसके साथ सही और सटीक जानकारी देना भी जरुरी है और हम इसकी पूरी कोशिश कर रहे है. 
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