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11 January 2019

अशोक चक्र से जुड़े वे सवाल जिनका जवाब कम लोग ही जानते है

सम्राट अशोक के शिलालेखो में प्राय: एक पहिया या चक्र बना हुआ है इसी को ही अशोक चक्र कहा जाता है. इस चक्र भारत में धर्म चक्र माना गया है और इसको " विधि का चक्र " कहा जाता है. यह चक्र सम्राट अशोक द्वारा बनाये गये सारनाथ के मंदिर और अशोक स्तम्भ पर स्थित है. अशोक चक्र को भारत के राष्ट्रिय ध्वज में भी जगह दी गई है. इस लेख में हम आपको अशोक चक्र से जुड़े उन सवालों के जवाब देने वाले है जिनका जवाब कम लोग ही जानते है.



1. अशोक चक्र को तिरंगा में क्यों शामिल किया गया था ?

अशोक चक्र में 24 तीलियाँ है जो मनुष्य के 24 गुणों को दर्शाती है. इसलिए इसको कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है. इन सभी 24 गुणों को अपनाने वाला देश सदेव उन्नति के पथ पर पहुँच जाता है शायद यही कारण है कि भारत के राष्ट्र ध्वज निर्माताओ ने राष्ट्र धवज से गांधीजी के चरखे को हटाकर इसकी जगह अशोक चक्र को  22 जुलाई 1947 को शामिल किया था. अशोक चक्र तिरंगे पर मध्य की सफ़ेद पट्टी पर नीले रंग में मोजूद है.


2. अशोक चक्र को रूपये में कब शामिल किया गया ?

अंग्रेजो के राज के समय भारतीय रुपयों पर किंग जार्ज कि तस्वीर हुआ करती थी. तब एक रुपया 16 आनों के बराबर हुआ करता था.आपने आठ आनों और चार आनों के बारे में भी सुना होगा जिनको कुछ सालो पहले ही बंद कर दिया गया था. 1957 में आनों वाली प्रणाली को बदल दिया गया और दशमलव प्रणाली आई जिसमे रुपया 100 पैसो के बराबर होता है. 

भारत के आजाद होने के दो साल तक किंग जोर्ज की फोटो वाली मुद्रा चलन में थी 1949 में इसमें बदलाव किया गया और किंग जोर्ज की जगह नोटों पर अशोक स्तम्भ को शामिल किया गया जिसमे अशोक चक्र भी बना होता है. महात्मा गाँधी कि तस्वीर को 1987 में नोटों पर छापा गया था.

3. अशोक चक्र पदक सम्मान क्या है ? और यह किनको दिया जाता है ?

अशोक चक्र पदक सम्मान सेना के जवान, आम नागरिक को जीवित या मरणोपरांत दिया जाता है. 1947 में स्वतंत्रता के बाद से अब तक 67 लोगों को अशोक चक्र सम्‍मान दिए गए हैं. इस सम्मान की स्‍थापना 4 जनवरी 1952 को हुई थी. शुरुआत में इसका नाम "अशोक चक्र, वर्ग-1" था. सन् 1967 में इस सम्मान से वर्ग की अनिवार्यता को हटा दिया गया और इसके समकक्ष तीन सम्मान घोषित किए गए. इनका नामकरण क्रमश "अशोक चक्र", "कीर्ति चक्र" और "शौर्य चक्र" किया गया. 1 फरवरी 1999 से केंद्र सरकार ने अशोक चक्र के लिए 1400 रुपए का मासिक भत्‍ता निर्धारित किया था.

4. अशोक में कितनी लाइन है और यह किस किस गुण को दर्शाती है  ?

अशोक चक्र में कूल 24 लाइन्स है और इनको तीलिया बोला जाता है और ये सभी तीलिया मनुष्य के अलग अलग गुणों को दर्शाती है जो इस प्रकार है -

  •  पहली तीली -  संयम ( संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देती  है )
  •  दूसरी तीली -  आरोग्य (निरोगी जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है)

  •  तीसरी तीली - शांति ( देश में शांति व्यवस्था कायम रखने की सलाह )
  •  चौथी तीली -  त्याग ( देश एवं समाज के लिए त्याग की भावना का विकास )
  •  पांचवीं तीली - शील ( व्यक्तिगत स्वभाव में शीलता की शिक्षा )
  •  छठवीं तीली - सेवा ( देश एवं समाज की सेवा की शिक्षा )
  •  सातवीं तीली - क्षमा ( मनुष्य एवं प्राणियों के प्रति क्षमा की भावना )
  •  आठवीं तीली - प्रेम ( देश एवं समाज के प्रति प्रेम की भावना )
  •  नौवीं तीली - मैत्री ( समाज में मैत्री की भावना )

  •  दसवीं तीली - बन्धुत्व ( देश प्रेम एवं बंधुत्व को बढ़ावा देना )
  •  ग्यारहवीं तीली - संगठन  ( राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत रखना )
  •  बारहवीं तीली - कल्याण ( देश व समाज के लिये कल्याणकारी कार्यों में भाग लेना )
  • तेरहवीं तीली -  समृद्धि ( देश एवं समाज की समृद्धि में योगदान देना )
  •  चौदहवीं तीली - उद्योग  ( देश की औद्योगिक प्रगति में सहायता करना )
  •  पंद्रहवीं तीली - सुरक्षा ( देश की सुरक्षा के लिए सदैव तैयार रहना )
  • सौलहवीं तीली - नियम ( निजी जिंदगी में नियम संयम से बर्ताव करना )
  •  सत्रहवीं तीली -  समता ( समता मूलक समाज की स्थापना करना )
  •  अठारहवी तीली -  अर्थ ( धन का सदुपयोग करना )
  • उन्नीसवीं तीली - नीति ( देश की नीति के प्रति निष्ठा रखना )
  • बीसवीं तीली -  न्याय ( सभी के लिए न्याय की बात करना )
  • इक्कीसवीं तीली -  सहकार्य ( आपस में मिलजुल कार्य करना ) 
  •  बाईसवीं तीली -  कर्तव्य ( अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना ) 
  • तेईसवी तीली - अधिकार ( अधिकारों का दुरूपयोग न करना )
  • चौबीसवीं तीली - बुद्धिमत्ता ( देश की समृधि के लिए स्वयं का बौद्धिक विकास करना )

5. कहा है दुनिया का सबसे बड़ा अशोक चक्र ?


भारत का सबसे बड़ा अशोक चक्र हरियाणा के यमुनानगर में है यह सुनहरे रंग और 30 फीट ऊँचा है और इसको यमुनानगर के अशोका इडिक्ट पार्क में स्थापित किया गया है. 

इसका प्लेटफार्म आठ फीट ऊँचा है. इसको बनाने में 45 लाख का खर्च आया और 12 कारीगरों ने 6 महीने में इसे तेयार किया था. इसमें 6 टन लोहा और 3 टन अन्य सामग्री लगी है.

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