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21 November 2019

Yoshinori Ohsumi - जापानी साइंटिस्ट ( ओटोफेगी प्रोसेस या सेल्फ इन्टिंग प्रोसेस को नए तरीके से दुनिया के सामने रखने वाले



योशिनोरी ओशुमी
जापानी साइंटिस्ट
9 फरवरी 1945 को जापान के फुकुओका में जन्मे जोशिनोरी ओशुमी सेल बायोलिजिस्ट है हाल ही में उन्हें चिकित्सा  के क्षेत्र में बॉडी सेल पर किये नए शोध के लिए नोबेल पुरुस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा हुयी है . इन्होने ओटोफेगी प्रोसेस या सेल्फ इन्टिंग प्रोसेस को नए तरीके से दुनिया के सामने रखा है . यह खोज बताती है की सेल्स अपने तत्वों को केसे रिसाइकिल करती है . उनकी खोज पार्किसन डायबिटीज और केंसर के उपचार में मदद कर सकती है 


रिसर्च एसोसिएट बनकर किया काम

ओशुमी टोकियो इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के फ्रंटियर रिसर्च सेन्टर में प्रोफेसर है . उन्हें वर्ष 2012 में बेसिक साइंस के लिए क्योटो पुरुस्कार मिल चूका है . उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोकियो से साइंस की पढाई की है . वह न्यूयॉर्क सिटी की रोकफेलर यूनिवर्सिटी में पोस्ट डोक्टरल फेलो रहे है .उन्होंने 1977 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोकियो में रिसर्च असोसिएट के रूप में काम किया है
  • अगर आप में है एंटरप्रेन्योर तो इन फोर्मुलो को अपनाये सक्सेस आपके पीछे भागेगा 
  • आखिर क्या है सफलता का राज और कुछ लोग ही क्यों सफल हो पते है 
  •       अगर आप करने जा रहे है नयी नोकरी तो आइये जाने कोनसे टिप्स आपके लिए जरुरी है 

शोध बचा सकते है बीमारियों से

वर्ष 1996 में ओशुमी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ बेसिक बायोलॉजी में प्रोफेसर के रूप में काम करने लगे वह ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी फॉर एडवांस्ड स्टडीज में भी प्रोफ़ेसर रहे . 2014 में रिटायरमेंट के वह इनोवेटिव रिसर्च इंस्टिट्यूट से जुड़े और  सेल्स के व्यवहार पर शोध कार्य करने लगे . इनके शोध कार्य इन्सान को कई बड़ी बीमारियों से बचा सकते है .
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  • ये है बोने लोगो का गाव जहा हर कोई है बोना और 60% लोग है 2फीट से कम लम्बाई के 

महत्वपूर्ण है ओटोफेगी प्रोसेस.......

ओशुमी प्रसिद्ध बायोलॉजिस्ट रहे है वह विज्ञानं से जुडी कई क़िताबे भी लिख चुके है ओटोफेगी पर उनका शोध काफी महत्वपूर्ण है ओटोफेगी प्रोसेस शरीर को बिना भोजन के रहने में मदद करती है, साथ ही वह बेक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करती है . ओटोफेगी प्रोसेस के फेल होने के कारण ही इन्सान में बुढ़ापा और पागलपन जेसी चीजे बढती है


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